ज़ुल्म सहकर भी हकीकत से मुँह मोड़ना कोई भारतीये मुसलमान से सीखे
दादरी,बालूमाथ,मेवात,अरवल होने के बाद भी हम कुछ नही सीखते और ना ही इसका असल वजह तलाश करते है कोई घटना होने के बाद हमें सिर्फ इतना चाहत होता है पीड़ित के परिवार को कुछ सरकारी सहायता मिल जाएँ पर क्या हम सरकारी सहायता लेकर फिर एक घटना को दावत नही देते?
ये सबसे बड़ा कारण है कि हम जान का मुआबजा लेकर भूल जाते है और फिर कुछ दिन बाद गौ आतंकवादी दूसरे मनुष्य के शिकार में निकल जाते है
आप अगर गहराई से मंथन करेंगे तो पता चलेगा की जितनी भी सेक्युलर पार्टी है वो गौ आतंकवादी के मुद्दे पर कुछ बोलती ही नही !राजस्थान के अलवर में घटी घटना पर गौर करें तो समझ आयेगा !
की पहलु खान को सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि वो मुसलमान ?
जबकि गाय को रमजान के वक़्त दूध निकलने के लिए ले जाया जा रहा
था पर्ची चलान सब होने के बाद पीट पीट कर पहलु खान को मार दिया गया
अब इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे भी खामोश है क्योंकि मामला मुसलमान से जुड़ा है और वहाँ की 24+2 विधायक वाली कांग्रेस बसपा भी खामोश है कांग्रेस बसपा को बहुत अच्छे से पता है मुसलमान जायेगा कहाँ बीजेपी हराओ नाम पर मेरे पास ही आएगा
अब वहाँ के लोग भी दुविधा में है की हमने तो बीजेपी हराओ नाम पर वोट किया था अब किस मुँह से मुख्यमंत्री के पास जाएँ इन्साफ मांगने के लिए
दोनों तरफ से इस मामले में मुसलमान पिसता है पर समझने की कोशिश ही नही करता तुम जिस गुजरात दंगा के नाम पर बीजेपी को हराओ का नारा कांग्रेस के कहने पे लगाते हो वही कांग्रेस के राज में गुजरात से भी बडे 100 दगे हो चूके है
तुम क्यों बीजेपी के नज़र में दुश्मन नंबर 1 बनते हो तुम वोट किसी को दो पर ख़ामोशी से हंगामा कर के नही क्योंकि अगर तुम खामोश होकर वोट करोगे तो सरकार किसी की बने जाकर इन्साफ मांग सकते हो
कांग्रेस का दोहरा रवैया किसी से छुपा नही है और जबतक खुद को राजनितिक में मजबूत नही करोगे तब तक मार खाते रहोगे क्यों देश में वही होता है जो राजनितिक पार्टियां चाहती है
तुम तो इतने बुज़दिल हो की तुम्हे ज़ुल्म बयान करने वाला भी भड़काव और बीजेपी को फ़ायदा पहुँचाने वाला नज़र आता है
आज भी अलवर मुद्दे पर वही बीजेपी का एजेंट ओवैसी ही आवाज़ उठा रहा है आज़म खान अबु आज़मी नसीमुद्दीन सिद्दीकी गुलाम नबी आजाद सब खामोश है
क्या राजस्थान के कांग्रेस और बसपा के 26 विधायक रोड पर उतर कर इंसाफ नही दिला सकते ?
अगर नही दिला सकते तो लानत है उनपर जो लोग बीजेपी हराओ पर वोट करवाते है
जाकर हैदराबाद में 7 विधायक की ताकत देख लो समझ आजयेगा अपने और पराये का फर्क।
दादरी,बालूमाथ,मेवात,अरवल होने के बाद भी हम कुछ नही सीखते और ना ही इसका असल वजह तलाश करते है कोई घटना होने के बाद हमें सिर्फ इतना चाहत होता है पीड़ित के परिवार को कुछ सरकारी सहायता मिल जाएँ पर क्या हम सरकारी सहायता लेकर फिर एक घटना को दावत नही देते?
ये सबसे बड़ा कारण है कि हम जान का मुआबजा लेकर भूल जाते है और फिर कुछ दिन बाद गौ आतंकवादी दूसरे मनुष्य के शिकार में निकल जाते है
आप अगर गहराई से मंथन करेंगे तो पता चलेगा की जितनी भी सेक्युलर पार्टी है वो गौ आतंकवादी के मुद्दे पर कुछ बोलती ही नही !राजस्थान के अलवर में घटी घटना पर गौर करें तो समझ आयेगा !
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जबकि गाय को रमजान के वक़्त दूध निकलने के लिए ले जाया जा रहा
था पर्ची चलान सब होने के बाद पीट पीट कर पहलु खान को मार दिया गया
अब इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे भी खामोश है क्योंकि मामला मुसलमान से जुड़ा है और वहाँ की 24+2 विधायक वाली कांग्रेस बसपा भी खामोश है कांग्रेस बसपा को बहुत अच्छे से पता है मुसलमान जायेगा कहाँ बीजेपी हराओ नाम पर मेरे पास ही आएगा
अब वहाँ के लोग भी दुविधा में है की हमने तो बीजेपी हराओ नाम पर वोट किया था अब किस मुँह से मुख्यमंत्री के पास जाएँ इन्साफ मांगने के लिए
दोनों तरफ से इस मामले में मुसलमान पिसता है पर समझने की कोशिश ही नही करता तुम जिस गुजरात दंगा के नाम पर बीजेपी को हराओ का नारा कांग्रेस के कहने पे लगाते हो वही कांग्रेस के राज में गुजरात से भी बडे 100 दगे हो चूके है
तुम क्यों बीजेपी के नज़र में दुश्मन नंबर 1 बनते हो तुम वोट किसी को दो पर ख़ामोशी से हंगामा कर के नही क्योंकि अगर तुम खामोश होकर वोट करोगे तो सरकार किसी की बने जाकर इन्साफ मांग सकते हो
कांग्रेस का दोहरा रवैया किसी से छुपा नही है और जबतक खुद को राजनितिक में मजबूत नही करोगे तब तक मार खाते रहोगे क्यों देश में वही होता है जो राजनितिक पार्टियां चाहती है
तुम तो इतने बुज़दिल हो की तुम्हे ज़ुल्म बयान करने वाला भी भड़काव और बीजेपी को फ़ायदा पहुँचाने वाला नज़र आता है
आज भी अलवर मुद्दे पर वही बीजेपी का एजेंट ओवैसी ही आवाज़ उठा रहा है आज़म खान अबु आज़मी नसीमुद्दीन सिद्दीकी गुलाम नबी आजाद सब खामोश है
क्या राजस्थान के कांग्रेस और बसपा के 26 विधायक रोड पर उतर कर इंसाफ नही दिला सकते ?
अगर नही दिला सकते तो लानत है उनपर जो लोग बीजेपी हराओ पर वोट करवाते है
जाकर हैदराबाद में 7 विधायक की ताकत देख लो समझ आजयेगा अपने और पराये का फर्क।
आपका भाई ज़ाहिद उमर अध्यझ, वार्ड 102S मजलिशे इत्तेहादुल् मुसलमीन दिल्ली प्रदेश्

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