जिशान आलम नगला राई मुजफ्फरनगर
दोस्तों मे एक हिन्दुस्तानी होने के नाते मेरी सामाजिक जिम्मेदारी कि एक कोशिश हे | मे अपने हिन्दुस्तानी भाईयो को यकीन दिलाना चाहता हू के किसी भी इंसान को बदनाम करना या किसी के दिलो को ठेस पहुंचाना मेरा इरादा नही हे और ना रहेगा |
एकता ही एक ऐसी चीज हे जिसमे सबसे बड़ी ताकत हे इस देश की ताकत हे भारत के चार सिपाही हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई इनमे से एक भी अगर अलग हो गया तो हमारा देश कमजोर हो जाएगा आपने एक कहानी तो स्कूल मे पढी होगी |एक बूढे आदमी के चार बेटे थे वे आपस मे लडते झगडते रहते थे एक दिन उस बूढ़े ने अपने चारो बेटो को अपने पास बुलाया और उन्हे एक लकड़ी का बड़ा सा गट्ठर देकर तोड़ने को कहा बेटो ने एक-एक कर तोड़ने की कोशिश की पर वे नाकाम रहे फिर उस बूढ़े आदमी ने अपने बेटो को गट्ठर खोलकर लकड़ी तोड़ने को कहा उन्होंने बारी बारी से लकड़ी तोड़ दी |
इस समय ये ही हाल हमारे देश का हे अगर हम अलग अलग रहेगे तो हमे कोई भी तोड़ सकता हे ओर हम साथ मिलकर रहेगे तो हमारा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता | किसी को अजान से परेशानी हे तो किसी को हिन्दुस्तान मे रहने वालों से परेशानी हे मे एक बात कहता हू के जिस दिन गंगा जमुनी तहज़ीब वापस आ गई उस दिन रूप बदल जाएगा अपने हिन्दुस्तान का |
आज हमारे समाज के सामने कई ऐसी चीज हैं जिन से लड़ने के बजाय हम उन पर पर्दा डालने की कोशिश करते हे इससे गुनाह करने वालो के होसले बुलंद हो जाते हैं ! एक काफ़ी मशहूर शेर अर्ज़ है
लोग टूट जाते हे एक घर बनाने मे तुम को तो शर्म नही आती बस्तीया मिटाने मे

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