By: Imran Khan MiM News: New Delhi
उत्तप्रदेश विधानसभा का चुनाव प्रचार अब थम चुका है | सभी पार्टीयां अब नतीजों के इन्तजार में है | ऐसे देखा जाए तो इस बार उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में मुकाबदा काफी कड़ा रहा | जहा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी भीतरी मतभेद से जुझती नज़र आई तो वही बसपा प्रमुख भी इससे दूर नही थी और दोनो पूरे चुनाव टक्कर देते हुए नज़र आए | भाजपा ने यूपी चुनाव को जहां अपनी “नाक की लड़ाई” बनाई तो दूसरी छोटी छोटी पार्टीयां भी पूरे चुनाव में संघर्ष करती नजर आई |.
देश के सबसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है , ये भी कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता यूपी होकर ही गुजरता है | तो फिर पार्टीयों ने भी यूपी की सत्ता में बैठने के लिए यूपी विधानसभा चुनाव में हर हथकंडा अपनाया , “विकास” से शुरु हुआ चुनाव प्रचार “कब्रिस्तान-श्मशान” तक जा पहुंचा | अगर पूरे यूपी विधानसभा चुनाव पर नज़र डाली जाए तो सबसे बड़ा दांव बीजेपी ने ही खेला है , तीसरे चरण के बाद तो जैसे बीजेपी की ओर से विवादित बयानों की बाढ़ सी आना शुरु हो गई |
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बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी | करीब 20 से ज्यादा कैबिनेट मंत्रीयों ने अकेले वाराणासी को आखिरी दिन तक सम्भाले रखा | पीएम मोदी खुद 3 दिन अपने संसदीय क्षेत्र में रहे ,जहाँ उन्होने पैदल दौर, रोड़ शो से लेकर मंदिरों में भी गए | अब इससे ही अन्दाजा हो जाता है कि बीजेपी के लिए यूपी विधानसभा चुनाव कितना महत्वपूर्ण और कितना नही है | बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनाव में करीब 1,200 रैलियां (हर रोज 28) राज्य में की | साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी की 20 रैलियों से बीजेपी ने राज्य में वापसी के लिए हर दांव चला जो कि पूरे चुनाव में दिखा भी |

.बीजेपी के लिए सबसे बड़ी जिंता पीएम नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणासी है | जहां से भी बीजेपी के लिए अच्छी खबरे नही आ रही है | वाराणासी कैंट से जहां बीजेपी के कार्यकर्ताओ की नाराजगी सौरभ को टिकट ना देने से है तो वही पिंडरा से काग्रेंस बढ़त बनाए हुए है | वही वाराणसी साऊथ से पिछले 7 बार के विधायक राय चौधरी को टिकट ना मिलने के कारण उनके समर्थको और कार्यकर्ताओ में नाराजगी है तो वाराणासी नार्थ सीट से भी बीजेपी के उम्मीदवार जायसवाल को बुनकरों और नाविको के विरोध का भी भुगतान करना पड़ सकता है |
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राज्य में पीएम मोदी के धुआधांर प्रचार से ये तो तय है कि
यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी पीएम मोदी के करिश्मे पर निर्भर है और खास तौर पर 11 मार्च को ये देखना होगा कि पीएम मोदी की वाराणसी में लोकप्रियता वही है, जो 2014 के लोकसभा चुनावों में थी | लेकिन मोदी का करिश्मा क्या वोटों में तब्दील होगा यह देखने वाली बात होगी |
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