UPDATE BY - SHAHID AKBAR
11 साल सलाखों के पीछे किताब लिखने वाले मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम मंसूरी ने गुजरात सरकार से माँगा 5 करोड़ माँगा हर्जाना ,आप को बता दे ये वह मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम है जिन्होंने अपनी जिंदगी के 11 साल सलाखों झुटे आतंवादी के इलज़ाम में पीछे निकाल दिया
24 सितम्बर 2002 अक्षर धाम मंदिर पे हुवे आतंकी हमले में अहमदाबाद के मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम को और उनके साथ कई और लोगो गिरफ्तार किया था
अक्षर धाम मंदिर पे हुवे आतंकी हमला को ले के गुजरात पुलिस ने गुजरात से कई बे कशुर मुसलमानो को गिरफ्तार किया था जो की इस बात की सीधी गवाही देता है की गुजरात पुलिस अपनी नाकामी को छुपाने के लिए बेकशुर मुस्लिम आलिमो को गिरफ्तार कर वह वही लूट में कामयाब तो हो गए लेकिन देश की न्याय पालिका ने इन बेकशुरू को 16 मई 2004 को बाइज्जत बरी कर देश मुस्लिमानो को इंसाफ का भरोसा दिया
मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम की गिरफ़्तारी के गुनाह काबुल ने के लिए कई हथ कंडे भी अपनाए गए लेकिन लेकिन कोई गुजरात पुलिस ने इस एक ठोस सबूत न्यायपालिका के सामने नही रख पायी जिसे देश की न्यायपालिका मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम को अक्षर धाम मंदिर पे हुवे आतंकी हमले के जिम्मेदार ठेरा सके !मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम ने आपने जिंदगी के आतंकवाद के झुटे इलज़ाम में 11 साल सलाखों के पीछे निकल दिए और उन 11 साल में हुवे उनपे जुल्म को लेके आज गुजरात सरकार से 5 करोड़ का हर्जाना माँगा है !
और साथ ही साथ अहमदाबाद सिविल कोर्ट में याचिका भी दखल की है जिस में ई I P S जीऐल सिंधल , D I G वंजारा , इंस्पेक्टर आर आई पटेल , रिटार्ड D S P वनार के खिलाफ
ये उन आधिकारियो के नाम है जिन होने मुफ़्ती अब्दुल क़य्यम को आतंकवाद के झुटे इलज़ाम में फ़साने के लिए एरिचोटी का जोर लगा जियादा था !
मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम ने आतंवाद के झुटे इल्जाम में 11 साल सलाखों के पीछे एक किताब लिखी है जिसमे
मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम ने अपनी जिंदगी बीते 11 साल के हर पहलु को बयां किया है और उनलोगों को बेनकाब किया है जो मुस्लिम कट्टर वाद पुलिस अधिकारी है!

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