BY:ज़ाहिद उमर अध्यझ, वार्ड 102 दिल्ली प्रदेश् 750327227
एक सवाल …
हर पार्टी कह रही है की वो मुसलमानो की सबसे बड़ी हमदर्द है हर पार्टी ढोल पीटते नहीं थक रही है की उसने मुसलमानो के लिए सबसे ज़्यादा काम किया लेकिन मेरी समझ में एक बात नहीं आयी …
की पिछले 69 सालो से लगातार मुसलमानो के हालात बद से बदतर होते चले गए , ना नौकरियां बची , ना कारोबार और ना ही तालीम है , ये कौन सी मोहब्बत और तरक्की के काम किये गए है हमारी कौम के साथ , की आज भी यही कहा जा रहा है की हमको वोट देदो वरना बी. जे. पी. आ जाएगी हम तुमको बी. जे. पी. से .
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मतलब हमको बी. जे. पी. से बचाया जा रहा है और खुद की कौमो को तरक्की की बुलंदियों पर बैठाया जा रहा है , और हम है की हर चुनाव के बाद पहले से भी ज़्यादा पस्ता-हालात में मुब्तिला होते जा रहे है , कहने का साफ़ मतलब है की ना तो हमारे लोगो के पास कारोबार के लिए पैसे है , और ना ही अपने बच्चो की अच्छी तालीम के लिए पैसे है , और जब तालीम नहीं तो नौकरियों का तो सवाल ही नहीं उठता ,
अब आप लोग सोच कर बताइये की मेरा सवाल कितना जायज़ है , बहोत से लोग हो सकता है मेरी सोच को ही नाजायज़ बता दे , लेकिन इसका जवाब अगर आप में से किसी के पास हो तो बताइये गा ज़रूर , खास कर उन तमाम सुक्युलर लोगो से अपील है की दोस्तों मुस्कुरा कर मुझे मन ही मन गाली देकर मेरी इस बात को नज़र-अंदाज़ मत कर दीजिये गा , एक बार इत्मीनान से सोचिये गा ज़रूर की इसमें गलती कहा हो रही है ,
क्योंकि इसके बिलकुल बरक्स दलितों के हालात आज सबसे बेहतर है उनके पास तालीम भी है और नौकरियां भी , और आज वो भी हमारी हिफाज़त करने की हमको सुरक्षा देने की बात करने लगे है , मतलब अब सब हमको सुरक्षा प्रदान करेंगे और हम सबसे सुरक्षा लेते फिरेंगे
कुल मिला कर हम अपनी और अपने घरो की अपने बच्चो की हिफाज़त करने के काबिल भी नहीं रह गए है , ये है हमारी ६९ साल की तरक्की … इसके ज़िम्मेदार को तो खोजना पड़ेगा …..
अब वक़्त आ गया हैं कि अपने क़यादत को मज़बूत करो।
अल्लाह ने एक रहनुमा भेज दिया हैं जिसका नाम बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी हैं।
चेहरे पे अल्लाह का नूर हैं सर पे टोपी हैं और 5 वक़्त अल्लाह की इबादत करता है और जब हम रात को सोते है औऱ वो हमारे क़ौम के लिए ताहज़्ज़ुड के नमाज़ में रोता हैं।
जब वो पार्लिमेंट में खड़ा होता है तो एकेले विपझ का रोल अदा करता और हक़ की बात करता।
आओ हम सब मिलकर असदुद्दीन ओवैसी का साथ अपने मुस्तक़बिल के लिए।
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